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हिंदू - मुस्लमान के नाम पर संतो को किया जा रहा है बदनाम

 

इस वक्त पूरा देश कोरोना महामारी जैसी विकट परिस्थितियों से गुजर रहा हैं
ऐसी स्थिति मे भी कई ऐसे लोग है जो हिंदू मुस्लीम के नाम पर संतो को निशाना बना के देश में अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं अभी हाल ही में पिछले पांच-छह दिनों से सोशल मीडिया पर जोधपुर के संत श्री कृपारामजी महाराज के फोटो वायरल करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही हैं. क्योकि कुछ मुस्लिम भक्तों के निवेदन पर वो मस्जिद में गए और वहां प्रवचन किये और प्रवचन में उन्होने सिर्फ़ देश भक्ति की ही बात कहीं. और मुस्लिम भक्त उनकी कथा में भी आते हैं, यहां तक कि कथा उन भक्तो के खेत में ही होती है. इनके अलावा मन्दिर निर्माण में भी उन लोगों ने सहयोग किया, तो ये सब बातें कई लोगों को खटकने लगी, लोग कहते है कि मस्जिद में जाके अल्ला ताला क्यू बोला, इस बात को लेकर लोग तरह तरह की बातें बनाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि कृपा रामजी ने मस्जिद में जाके सबसे पहले कृष्ण वन्दना की फिर गुरु वन्दना की उसके बाद उन्होने अल्लाह का नाम लिया.
फिर उन्होने desh भक्ति की बात कहीं. 
 
27 वर्षीय संत श्री कृपारामजी महाराज के प्रवचन और कथा में हमेशा ओजस्वी रूप से देश भक्ति की बातें निकलती हैं संत श्री कृपारामजी महाराज ने मात्र साढ़े चार वर्ष की उम्र में ही घर परिवार का त्याग कर संत जीवन अपनाया, और 5 वर्ष की उम्र में ही बिना पढ़े लिखे, बिना स्कूल गए आध्यात्मिक प्रवचन करने लगे. 7 साल की उम्र में अहमदाबाद में हज़ारों साधु संतो के बीच 8 वीं धरम सभा को संबोधित 
भारत के कई राज्यों मे कथा प्रवचन करते हुए भारत के बाहर बैंकॉक मे  11 वर्ष की उम्र में भागवत कथा करके सनातन धर्म का प्रचार किया

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